मीडिया का सच----भाग 8...चापलूसी परमो धर्म:

चापलूसी परमो धर्म.. जी हां मै एक ऐसी बात कह रहा हूं जिसका सरोकार कभी न कभी हर किसी से पड़ता है क्योंकि चापलूसों की एक ऐसी दुनिया है जिसमें हर किसी को इंट्री नहीं मिलती है। कभी आपने सोचा है कि ऑफिस में आप भी काम करते हैं और आपके साथी भी लेकिन ऐसा क्यों होता है कि आपके देखते ही देखते दूसरा आपसे आगे निकल जाता है जबकि वो आपसे कम दक्ष होता है। आप कहेंगे कि यार कमाल है... वो आगे निकल जाता है हो सकता है कि वो अच्छा काम कर रहा होगा... लेकिन इसमें उसका अच्छा काम करना नहीं है। इस आगे बढ़ने की कला में उसके द्वारा उस क्वालिटी को आगे लाना है जिसमें हम आप निपुण नहीं हैं। जी हां अब आप कहेंगे कौन सी क्वालिटी भाई। तो भईया हर ऑफिस की तरह मेरे ऑफिस में भी हर रोज इस तरह के करतब सामने आते रहते हैं। हमारे यहां भी लोग काम करने के बाद अपने बॉस को ये बताने ज़रूर जाते हैं कि उन्होने कितना अच्छा काम किया। (एक उदाहरण बिना नाम लिए बता रहा हूं सच मानियेगा) ऐसे ही हमारे साथ काम करने वाले एक कर्मचारी हैं कहने को तो हमारे बैंड एडिटर हैं लेकिन काम करने के बाद ये बताने से पीछे नहीं हटते कि उन्होंने क्या काम किया दूसरे कौन कौन से लोग हैं जिन्होने क्या नहीं किया। हर पांच मिनट बाद बॉस के पास हाज़िरी लगाते हैं। ऐसे लोग ये बताने से भी नहीं चूकते कि ..अरे अगर वो न होते तो चैनल कैसे चलता मेरा मतलब है कि दूसरे के काम को अपना काम बताने से भी नहीं चूकते हैं। (दूसरा उदाहरण बिना नाम लिए) मेरे सामने ही हमारे एक सीनियर साहब पहले तो एक साधारण कर्मचारी थे लेकिन पासा पलटा औऱ जिनकी वो चापलूसी करते थे वो महाशय चैनल के सुपर सीनियर बन गये फिर क्या था हर जगह की तरह शुरु हो गया शिफ्टिंग का खेल और चापलूसी का मीठा फल उन्हें मिल गया और बन गये वो लोगों के बॉस। जैसे की मैने अपने पिछले लेख में लिखा था कि बॉस बनते ही फ्लर्टिंग का महत्वपूर्ण कार्य शुरु हो जाता है वो शुरु हो गया। साथ ही साथ जी हूज़ूरी का काम तो पहले जैसा ही चलता रहा। मन मांगी मुराद पूरी हो गयी। मेरी समझ में ये नहीं आता कि उन्हें मैने अपने कार्य स्थल के अभी तक के जीवन में एक बार भी उन्हें कोई न्यूज़ कॉपी लिखते नहीं देखा, कभी मैने उनका अच्छा वायस ओवर नहीं सुना,(यहां ये बता दूं कि ऐसे लोग दूसरों को काम सीखाने में पीछे नही रहते हैं, हमारे एक धुरंधर आर्टिस्ट को अच्छे काम के गुण सिखा रहे थे) डेस्क पर काम करते नहीं देखा.. तब ये लोग कैसे इतनी बड़ी पोस्ट पर पहुंच जाते हैं कमाल तो इस बात का है वहीं मेरे सामने कुछ बहुत ही धुरंधर लोग भी काम करते हैं जो हर चीज़ में माहिर हैं लेकिन उनकी अनदेखी की जा रही है। ऐसे लोग भी दिन ब दिन टूटते जाते हैं क्योंकि अगर आपको चैनल हेड बना दिया जाता हैं और फिर उस पद से हटा दिया जाए उस वक्त निराशा अपने चरम पर होती है। ऐसा ही हुआ है। कुछ लोग बुरी तरह निराश है वो अपने काम को पूरा कर देते है और घर चले जाते है। लेकिन जो जोश उनमें दिख रहा होता है वो ख़त्म हो जाता है। इसीलिए जो लोग इस फील्ड को अपनाने की सोच रहे हैं वो लोग जल्द से जल्द चापलूसी का मंत्र जिनको नहीं आता वो क्लासेस लेना शुरु कर दें। वो सीख लें या फिर तैयार रहें अपने से कम जानकार को अपना सीनियर बनते देखने के लिए। लेकिन एक सीख उन लोगों के लिए जिनके लिए चापलूसी परमो धर्म है कि भईया तैयार हो जाओ कॉम्पटीटर आ रहे हैं आपसे भी ज्यादा चापलूसी की नई तकनीकि लेकर.....

1 टिप्पणियाँ:

बी. एन. शुक्ल June 19, 2009 at 7:02 PM  

बहुत अच्छा लिखा आपने।