सर वो.... बहाना बना रहा है


रात के दस बज रहे हैं और मैं सोने की तैयारी कर रहा था कि तभी मेरे फोन की मनहूस घंटी बजती है। मनहूस इसलिए क्योंकि जब जब ये बजती है तब तब मुझे शिफ्ट पूरी करने के बाद भी दूसरे की शिफ्ट करनी पड़ती है। मै ऑफिस पहुंचा मेरे सर ने मुझसे कहा कि भाई देखो ऐसा करो कि तुम ज़रा थोड़ी देर की शिफ्ट कर लो सारिका की( परिवर्तित नाम) मैने कहा कि क्यों सर क्या हुआ वो क्यों नहीं आई। उन्होने कहा कि वो कुछ बीमार है मैने कहा कि सर अमर कि आज कहीं शिफ्ट नहीं लगी है तो उससे करवा लीजिये। नहीं यार तुम्हे करना है तो कर लो किसी और की नाम मत सुझाओ। मैने कहा कि बास का मूड बिगड़ने से पहले हां कर दो नहीं तो इसका गलत परिणाम भुगतना पड़ सकता है। मैने हां कर दी। अब यहां की हालत न पूछिये। यहां आप अपना काम तो करिये साथ ही दूसरे का काम करने से भी पीछे मत हटिये क्यों कि उस वक्त आपकी कर्तव्यनिष्ठता पर सवाल खड़े होने लगेंगे। यहां उन लोगों को फायदा मिलता है जिन पर आलाकमान का हाथ होता है। यहां आप अपने काम से नहीं बल्कि अपने काम के साथ साथ दूसरों के काम करने से जाने जाते हैं। यहां आप अपना काम करते रहिये ईमानदारी से लेकिन आपको कोई नहीं पूछेगा लेकिन अगर आप आपने किसी औऱ का काम करन से मना कर दिया समझ लिजिये आपने कोई काम नहीं किया जी हां क्योंकि आपकी शिकायत इसी तरह की जायेगी। ईमानदारी यहां आपके काम से नहीं बल्कि दूसरे के काम को करने से नापी जाती है। अगर आप कर्मठ हैं तो समझिये लौटरी लग गई अरे आपकी नहीं उन लोगों की जो आपके बॉस के चहेते हैं। क्योंकि वो अपने काम के लिए आपको बकरा बनायेंगे। और फंस कर काम करते रहेंगे लेकिन मलाई वो खायेंगे और आप मज़दूरों की तरह से काम करते रहेंगे। लेकिन अगर आपने कभी भी ये कह दिया कि आप काम नहीं कर सकते क्योंकि आपकी तबियत खराब है तो वही लोग ये कहने से पीछे नहीं हटेंगे कि साला बहानेबाज़ी कर रहा होगा...मज़े की बात तो ये है कि ये बात तो वो आपके बॉस से कहने से नहीं चूकेंगे। और तो और चार बातें और बतायेंगे। आपसे मदद की उम्मीद हमेशा रखेंगे लेकिन आपकी मदद कभी नहीं करेंगे। क्योंकि उस वक्त उनकी सहूलियत में कटौती करनी पड़ती है। आप कुछ कर भी नहीं सकते क्यों उस वक्त बॉस आपकी नहीं उनकी सुनेगा क्योंकि वो चहेते ज्यादा हैं भाई साहब....

5 टिप्पणियाँ:

बी. एन. शुक्ल July 4, 2009 at 7:46 AM  

बहुत खूब! ऐसा ही होता है।

Akanksha Yadav July 7, 2009 at 12:35 PM  

Bebaki se bat kahne ke liye sadhuvad !!


"शब्द-शिखर" पर आप भी बारिश के मौसम में भुट्टे का आनंद लें !!

Randhir Singh Suman July 9, 2009 at 5:09 PM  

thik hai.

Randhir Singh Suman July 9, 2009 at 5:10 PM  

thik hai.

मनीष राज मासूम October 16, 2009 at 9:21 AM  

bhai media doot badhiya hai,bahut badhiya