बड़े दिनों के बाद फिर मैं मजबूर हुआ उन बातों को लिखने को जिनको लिखकर शायद मै अपना ही मज़ाक बनवाता हूं। यानी अपनी ही क्षेत्र की बुराई को उजागर करके। जी हां पर क्या करुं पत्रकार जो ठहरा चुप भी तो नहीं बैठ सकता। आज मै बात करुंगा ऑफिस में काम करने वाले हर उस आदमी के सपने की जिसको वो काम करने के बाद देखता है। और
वो सपना है बॉस बनने का सपना देखना। जी हां आप, हम, हर कोई अपने कार्यक्षेत्र में सर्वोच्च की कुर्सी पर बैठना चाहता है। लेकिन हमारी दुनिया की बात और है। जी हां हर कोई बॉस क्यों बनना चाहता है। वो चाहता है कि हर कोई उसे सलाम करे...जब वो जाये तो हर कोई उसे इज्जत दे..आवभगत करे.....लेकिन....????...यहां मामला दूसरा है। मीडिया में काम करने वालों एक सबसे गंदी बात क्या होती है.....? वो होती है खुद को सर्वेसर्वा समझने लगना। मतलब खुद को सबसे ताकतवर समझना। इसलिए जब कोई इस दुनिया में बॉस बनता है तब वो क्या सोचने लगता होगा ये तो आप समझ गये होंगे। यहां कोई बॉस बनता है वो समझता है कि वो सबको अपनी मुठ्ठी में कर सकता है। बॉस बनने के बाद कोई सबसे पहले क्या करना चाहता होगा। शायद सबके अलग अलग जवाब हो लेकिन जब कोई यहां बॉस बनता है तो सबसे पहले सोचता है कि अब अपने ऑफिस की कौन सी लड़की से मज़ा लिया जाए। कहने में ये बात इतनी ओछा है कि मुझे शर्म आ रही है पर बताना जरुरी है। ये इस दुनिया का वो घिनौना चेहरा है जिसे देखकर मेरा मन बड़ा दुखी हो जाता है। उस वक्त कोई भी इस पर उँगली नहीं उठा सकता क्योंकि उस वक्त वो बॉस होता है। और उस वक्त शायद देखकर ऐसा जी करता है कि ऐसों को ऐसा सबक सिखाया जाए कि वो ज़िंदगी भर न भूले मगर वक्त ठीक नहीं होता इसलिए इंतजार करना होता है। इसी तरह बात शुरु होती है जब बॉस अपने कर्मचारियों को काम से बुलाता है और साथ कहीं चलने को कहता है लड़की अगर समझदार है तो वो तुरंत समझ जाती है और मना कर देती है या बहाना बना देती है। लेकिन मना करने से एक बात और खड़ी होती है औऱ वो ये कि ऐसा करके शायद वो अपने बॉस की नजरों मे चढ़ जाती है। मगर चलो इज्जत तो बच जाती है । लेकिन जो लड़की इन चालों को समझ नहीं पाती वो ऐसे बॉस के चंगुल में फंस जाती है और फंसती ही जाती है। पत्रकार बिरादरी में बातें तो बड़ी होती हैं पर एक सच ये भी है कि यहां भी बॉस अपने नीचे काम करने वाली लड़की को अपने चंगुल में फंसाने की कोशिश जरुर करता है। और सब जानते हुए भी सभी लोग अंजान बनते हैं। क्योंकि वो भी बेबस हैं सीधे तौर पर कुछ नहीं कर सकते हैं। इसलिए मैंने अपनी पत्रकारिता के जीवन में अभी तक जो देखा है उसे समझते हुए एक बात तो सीखी है कि सभी लड़कियों को सिर्फ अपने काम से मतलब रखना चाहिए बस। क्योंकि अगर आपको ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद आपका कोई बॉस आपको फोन करके आपके रहने की जगह या क्या कर रही हो जैसे बेफिजूल के सवाल करें तो सावधान हो जाइए क्योंकि अगला शिकार आप का हो सकता है इसलिए अपना काम करें औऱ ऑफिस टाइम के बाद अपने परिवार के साथ समय बिताएं न कि बॉस के साथ फोन पर जाल में फंसे। क्योंकि यहां पर काम करने वालों की बीवियां चाहें कितनी भी सुंदर क्यों न हो हर कोई दूसरी की थाली में नज़र ज़रुर डालता है औऱ खाने की फिराक में जरुर रहता है। और घरों में बंद बीवियों को कुछ ख़बर नहीं रहती है। वहीं ऐसे बॉस इसे बॉस होने का हक़ बताने से भी नहीं चूकते। अगली बार इसी बात से जुड़ा उदाहरण पेश करुंगा अगर जरुरत पड़ी तो पर शायद नाम न ले सकूं क्योंकि किसी की इज्जत का सवाल है।
NewsGram: News media from Chicago
10 years ago

4 टिप्पणियाँ:
यस बॉस !!!!आपने ठीक कहा ..बॉस बनने और सर्वेसर्वा समझने की बीमारी बढती जा रही है...
मीडिया दूत..जी आपका बहुत बहुत धन्यबाद की आप मेरे ब्लॉग पे आयें और मेरा होशला बढाया...मैंने आपका पोस्ट मीडिया का सच...पढ़ा आपने मीडिया में व्याप्त गंदगी को बरी साफगोई से लिखा है...
Anek shubh kamnayon sahit swagat hai...medea ke bareme aaye din padhte rahte hain...jaisa har jagah hota hai, wahee yahan bhee...aakhir insanee zehniyat sab jagah ekhee hotee hai!
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Mere any sabhi blogs pe swagat hai!
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