मीडिया के कड़वे सच - भाग 2

एक दिन न्यूजरुम में मै अपनी सीट पर बैठा अपना काम कर रहा था....तभी अचानक किसी के चिल्लाने की आवाज आयी....वैसे तो अक्सर न्यूज़रुम में तरह तरह बहस होती है पर ये बहस आम नहीं थी....इस बहस में हिस्सा बने कई बड़े चैनलों में काम कर चुके एक नामी ऐंकर (यहां नाम लेना उचित नहीं है पर फिर भी मै उनक नामकरण 'राज' के तौर पर कर देता हूं) उनकी बहस हमारे के एक सहयोगी (जो कि अभी एक इंटर्न हैं) से हो रही थी....वैसे राज का इस बहस में पड़ना एक झगड़ा सुलझाने वाले बड़े आदमी के तौर पर हुई थी....उससे पहले हमारे सहयोगी की बहस एक महिला कर्मचारी से हो रही थी वो भी किसी काम को लेकर....बहस ने जब उग्र रुप ले लिया तब राज जी को मैदान में लड़ाई शांत करवाने उतरना पड़ा
....लेकिन हमारे सहयोगी का भी गुस्सा शांत नहीं हुआ था....राज जी के चिल्लाने पर भी वो लड़का उनसे बहस करने लगा...तब राज का गुस्सा और भड़क गया....उन्हें शायद ये लगा होगा कि ये अदना सा लड़का उनसे बहस कर रहा है...दूसरी तरफ से लगातार जवाबी कार्रवाई को देख ..इस बहस से राज जी को अपनी वरिष्ठता पर सवाल खड़ा होता दिखाई दिया....तब उन्होने उस लड़के से कहा कि ऐ लड़के तुम मुझसे बहस करोगे......इस पर वो लड़का बोला मेरा नाम ऐ लड़के नहीं रोहित है (काल्पनिक नाम) इतना कहना था कि हमारे एक सीनियर दृश्य संपादक(विडियो एडिटर) का हाथ उठ गया...उन्होंने एक ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया रोहित के गाल पर.....न्यूजरुम में हुई ये शर्मनाक हरकत यहीं नहीं थमी...सीनियर दृश्य संपादक को हाथ उठाता देख उनके जूनियर ने भी तुरंत एक दो तमाचे और जड़ दिये रोहित पर.....इतना होना था कि चैनल में बवाल मच गया...सभी जूनियर्स ने काम करना बंद कर दिया.....इतने में न्यूजरुम की असली मर्यादा सामने आ गई और सीनियर का अनुशासन की सीख देने का सच सामने आ गया.....इस हाथापाई के बाद कुछ बातें है जिसको बताना जरुरी है क्योकि असली सच अब सामने आयेगा... जैसे कि मैने बतायी कि हमारे एंकर साहब राज जी है जो कि एक चैनल हेड भी हैं और उनके सामने अपने नंबर बढ़ाने का जो खेल खेला गया वो आप अब समझ पाये होंगे......क्योंकि सीनियर दृश्य संपादक ने हाथ इसलिए उठाया ताकि उनके नंबर बढ़ जाए राज जी के सामने और जूनियर दृश्य संपादक ने हाथ उठाया ताकि उनके नंबर बढ़ जाए अपने सीनियर के सामने....जबकि ये तो साफ था कि दृश्य संपादकों का इस बहस में कूदने का कोई औचित्य ही नहीं था....लेकिन मामला चूंकि एक महिला कर्मचारी से बहस से जुड़ा था और इसमें एक चैनल हेड जुड़ गये थे तो इसलिए भी सभी लोग एक दूसरे से बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे..ताकि चैनल हेड के आगे अपनी वफादारी दिखा सकें या कहें कि दिखावा तो कर ही लें.... हां यहां एक बात और गौर करने लायक है कि अगर महिला की जगह कोई पुरुष कर्मचारी होता तो शायद किसी को बहस में पड़ने की जरुरत महसूस नहीं होती.....मीडिया में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के विषय में आगे बात करते रहेगें..उस वक्त जब कोई और बेहूदी घटना मुझे उस पर लिखने को मजबूर करेगी.......

3 टिप्पणियाँ:

Anonymous May 3, 2009 at 11:10 AM  

भाई मामला गंभईर है

Anonymous May 3, 2009 at 11:27 AM  

दुनिया के हमाम मे सभी नंगे है...और नंग परमेश्वर से बड़ा होता है ....और ये सच कड़वे नही है..नए लोगो के लिए ये सच कड़वे हो सकते है लेकिन पहले से काम कर रहे लोगो के लिए रोज़मर्रा की बात है...खैर आप अपनी लेखनी चलाते रहे अपने आस पास ही घटने वाले किसी और सच का इंतजार रहेगा....

Anonymous May 4, 2009 at 2:33 AM  

मित्तल की मां की चूत