मै एक पत्रकार हूं इसलिए बात मीडिया की करता हूं पर मीडिया क्या किसी भी क्षेत्र में करियर की शुरुआत अगर होती है तो वो होती इंटर्न्स बनकर....लेकिन मीडिया में इंटर्न्स से काम लिया जाता है मज़दूरों कि तरह....मै औऱ जगहों कि बात तो नहीं करुंगा मैं बात करुंगा अपने ऑफिस की.....हमारा एक नामी चैनल है जो सिर्फ ख़बर दिखाता है क्योकि उसे लगता है बाकी सब भ्रम है औऱ वो ख़बर हैं...इनका एक इंस्टिट्यूट हुआ करता था...जो कि अब बंद हो गया है.....इसके पहले बैच के बच्चों को शतप्रतिशत प्लेसमेंट के सपने दिखाकर लाखों रुपये ले लिये गये.....इनका बाकायदा कोर्स भी कराया गया.....मेरी जिन बच्चों से बात हुई है उनमें से कुछ तो कहते हैं कि वहां पढा़ई सिर्फ नामभर को होती थी....औऱ कुछ कहते है कि नहीं होती थी.....इन लोगों को बाकायदा प्लेसमेंट भी मिली और वादे के मुताबिक प्लेसमेंट मिली.....ये अलग बात है कि पहले तो इनसे वादा किया गया था कि इन्हें पंद्रह हज़ार के आसपास की सैलरी दी जाएगी पर समय बदला और रकम पंद्रह से पांच तक आ गई
...किसी तरह बच्चों को कुशल प्रबंधन तंत्र ने चुप करा दिया था अब बच्चे भी क्या करते उन्होने लाखों रुपये फंसा दिये थे इस लालच में कि चलों कुछ तो मिला....मै यहां उनकी हालत बता दूं उस वक्त की जब ये बच्चे पढ़ रहे थे...इनमें ज्यादातर वे लोग थे जो मीडिया में धक्के खाने के बाद इसलिए यहां एडमिशन ले चुके थे क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि कम से कम नौकरी तो मिली या कहें कि इन्ट्री तो मिली....इसलिए सभी चुप थे इस उम्मीद में कि चलो कम से कम नौकरी तो मिली भले ही पांच हज़ार की ही क्यों न हो......असली शोषण तो अब शुरु हुआ था....लगभग 108 बच्चों को उनके कोर्स के हिसाब से अलग अलग विभाग बांट दिये गये ये कहकर कि आप एक महीने इंटर्न की तरह काम करेंगे औऱ फिर बाद में आपको प्रोबेशन पर पांच हज़ार रुपये दिए जाएंगे....दिखावे के लिए बाकायदा एक कागजी दस्तावेज़ भी दिया गया....लेकिन समय बीतता गया औऱ एक महीने बाद शुरु हुआ प्रोबेशन पीरीयड.....अभी तक कोई भी कागज़ी कार्रवाई नहीं कि गई थी....इस चाल को ये छोटे बच्चे समझ नहीं पा रहे थे....क्योंकि अगर कागज़ी कार्रवाई हो जाती है तो पैसे तो कानूनी रुप से देने पड़ते हैं....इसलिए एक प्लानिंग के तहत इन लोगों को किसी तरह का दस्तावेज़ नहीं दिया गया जिससे ये लगे कि ये लोग संस्था के कर्मचारी नहीं हैं.....लगभग दो महीने बीत गये अब आई सैलरी देने की बारी....इन मजदूरों कि तरह काम करने वाले बच्चों से कहा गया कि आप लोग काम अच्छा नहीं करते हैं......पिछले दो महीने से 15 से 16 घंटे काम करवाने के बाद उनसे कहा जाता है कि आप लोग काम ही नहीं करते ....वहीं एक बात गौर करने लायक है कि जिस वक्त इस चैनल से लगभद सभी लोग छोड़कर जा चुके थे औऱ बहुत ही कम लोग इस चैनल में काम कर रहे थे उस वक्त इन्ही फ्री के मज़दूरों ने चैनल में काम करके उसकी डूबती नैय्या को पार लगाने में मदद की....लेकिन दो महीने फ्री मे काम करवाने के बाद उनसे कहा जाता है कि आप काम ही नहीं करते आपका एसेसमेंट किया जाएगा......मरते क्या न करते की तर्ज पर इन बेवकूफ बने बच्चों ने इस पर भी काम्प्रोमाइज़ किया....फिर एक महीना बीत गया सभी ने लगन से काम किया औऱ अच्छा काम किया वो अलग बात है कि इस बीच कुछ मौकों पर यहां के कुछ कर्मचारियों ने इनका शोषण भी किया औऱ अपनी गलतियां इनके सर मढ़ने की कोशिश भी की पर फिर भी सभी कुछ सहन करते हुए ये काम करते गये ये सोच कर कि चलो सीनियर तो कुछ न कुछ बोलते ही है.....पर आज भी इन बच्चों को उनके पैसे नहीं मिल रहे हैं आज लगभग पांच महीने होने वाले है औऱ इन बच्चों को इनकी मेहनत की कमाई की झलक तक देखने को नहीं मिली है...मिला है तो बस सैलरी मिल जाने का आश्वासन जो कि तब से मिल रहा है जब से ये चैनल ज्वाइन किया है....कभी कोई ग्रुप एडीटर ये कहता है कि अगर वे सैलरी नहीं दिलवा पाये तो चैनल छोड़ देंगे.... और तो और या तो कोई चैनल हेड कहता है कि वो कोशिश कर रहे हैं कि सैलरी मिल जाएगी पर अंत में वहीं ढाक के तीन पात.....ये सिर्फ इस चैनल का सच नहीं है लगभग हर चैनल में यही होता है कि इंटर्न्स से मज़दूरों की तरह काम लिया जाता है गलत कामों पर डांटा भी जाता है पर जब पैसे देने की बात आती है सब हाथ खड़े कर लेते हैं.....एक बात औऱ बता दूं कि अगले भाग में मै चर्चा करुंगा सीनियर के सुझावों और सलाहों की सच्चाईयों पर.....क्या है आपकी राय ज़रुर बताईयेगी औऱ ये सच हर उन लोगों तक पहुचाईयेगा जो लोग मीडिया में रहकर काम करना चाहते हैं..
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10 years ago

1 टिप्पणियाँ:
फ़सादी said...वादा और वादा खिलाफी इनकी आदत है....
इसके लिए कुछ न कुछ किया जना चाहिये....
एसें मे दुश्यत का ये शेर याद आता है ..हो गइ है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिये अब इस हिमालय से कोइ गंगा निकलनी चाहिये.हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नही मेरी कोशिश है की यो सूरत बदलनी चाहिये........
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