क्या आपको किसी ने अपनी गलती के लिए गलत ठहराया है...एक बार मै तंग आकर ऑफिस में बरबस यूं ही बोल गया कि आइडिया हमेशा बॉस के दिमाग में क्यों आता है और बॉस की गलती हमेशा मुझसे क्यों होती है'' इस सवाल का जवाब मुझे आज तक नहीं मिल सका है 
...मै यहां बात करुंगा अपने करियर की शुरुआत की...जब मैं जूनियर था....बात में ऑफिस की करुंगा...हमेशा गलती का ठीकरा मेरे सर ही थोपा जाता था । ऐसे ही एक बार मेरे एक सर मुझे समझा गया कि देखों टिकर(टिकर वो होता जाता जो टीवी स्क्रीन पर शब्द चलते है स्क्रीन के नीचे की पट्टी पर) पर ये गलत चल रहा है इसे ठीक करो । इसमें शब्द गलत चल रहे हैं । मैने उनसे कहा कि ये सही लिखा है सर आप कंफ्यूज़ हो रहे हैं...लेकिन उनको उस शब्द पर कम अपनी वरिष्ठता पर ज्यादा विश्वास था , सो वो गलत लिखवा कर चले गये । थोड़ी देर बाद उनके सीनियर आ गये उन्होने देखा कि वो शब्द गलत चल रहा है टीवी पर । तो उन्होने ने मुझे बुलाया और इसे ठीक करने को कहा मैने कहा कि सर मैने ठीक ही लिखा था पर ये तो दूसरे सर ने गलत लिखवा दिया....तो उन्होने हमारे सीनियर को बुलाया तो वो महाशय तो साफ मुकर गये वो कहते हैं कि सर ये तो इंटर्न है इसने ही गलत लिख दिया होगा मै इतनी बड़ी गलती क्यों करुंगा । इस बार भी उन्हें अपनी वरिष्टता पर यकीन था कि वो तो बच जाएगें और मेरी वाट लग जाएगी । लेकिन वो तो भला हो सुपर सीनियर सर का कि वो पहले से मेरा काम देख चुके थे और कई दिनों से अपने उस पुराने साथी के काम को झेल भी रहे थे । इसलिए मुझे कुछ कहा नहीं , खैर ये तो हुई एक घटना अब मै एक और घटना बताता हूं जिसमें कैसे लोग अपनी गलती दूसरे के सर मढ़ते हैं , ये सब ज्यादातर मीडिया में होता हैं क्योंकि यहां पर कोई अलग काम नहीं करता सभी का काम किसी न किसी से जुड़ा होता है । इसलिये यहां पर एक दूसरे के सिर गलती मढ़ने का काम ज्यादा होता है । मै शुरु करता हूं चैनल के सबसे ग्लैमरस काम यानी टीवी ऐंकरिंग से । मै एक दिन पीसीआर जहां से कोई प्रोग्राम रिकॉर्ड होता है और फिर ऑन एयर होता है , वहां खड़ा था, मैने देखा कि एक ऐंकर आया वो अपना सीट पर आकर बैठा अब बुलेटिन रिकॉर्ड होने का काम शुरु हुआ । एक ख़बर रिकॉर्ड हो गई दो हो गई और जैसे ही तीसरी रिकॉर्ड होने वाली थी वहां पर टीडी साहब जो बुलेटिन रिकॉर्ड करवा रहे थे उनका कॉल आ गया । वो बतियान लगे तो काम लेट हो गया । बुलेटिन में लेट होते ही सीनियरों का आना शुरु हो गया तो टीडी महोदय ने ऐंकर पर ये कहकर आरोप लगा दिया कि ये लेट हो गये थे जिसकी वजह से फ्रेम बनने में लेट हो गया जिससे बुलेटिन देर से रिकॉर्ड हुआ । अब नया एंकर क्या कहता औऱ कोई क्यों मानेगा उसकी जब सीनियर टीडी उसे दोषी ठहरा रहा है तो सीनियर सर ने बढ़िया से उस एंकर की ख़बर ली और चले गये । अपनी गलती ऐंकर के सिर मढ़कर टीडी ने अपनी नौकरी तो बचा ली पर उसकी नौकरी बचेगी या नहीं कोई नहीं जानता । ऐसी ही एक घटना और है जिसको संक्षेप में बता रहा हूं कि एक बार एक एंकर ने कुछ गलत बोल दिया था टीवी पर । अब एक सीनियर सर जो कि काम से तो नहीं पर पद से सीनियर ज़रुर थे उन्होने पास ही रखे टीवी की वाल्यूम तेज़ करके गलती बताना शुरु कर दी, ऐंकर को नहीं आस पास के लोगों को , वो सिर्फ इसलिए कि वो एंकर नया था, सच मानिए उन महोदय ने अपने पूरे कैरियर में कभी एंकरिंग की कुर्सी पर भी नहीं बैठे होंगे पर, इसलिए उन्हें क्या जानकारी होगी एंकरिंग की वो तो आप समझ गये होंगे । और छोटी सी उम्र में एंकर बन गये उस लड़के को अपनी वरिष्ठता का सबक सिखाने लगे थे । इस क्षेत्र में क्या, लगभग हर क्षेत्र में ये होता है कि आपके अच्छे काम को कोई नही सराहेगा पर आपकी गलती को हर कोई बार बार सुनना देखना और दिखाना चाहेगा । और जो कोई ऐसा करे निश्चित ही वो आपका दोस्त तो नहीं हो सकता......नये लोगों से यही कहुंगा कि संभल कर काम करें क्यों कि हर शाख पर उल्लू बैठा अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा....भगवान जाने , संभल कर रहें।
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10 years ago

2 टिप्पणियाँ:
ye sach hai ki jo jis duniya main rahta hai wo hi uski sacchaiyaan sabke samne la sakta hai....aapka prayaas kai logon ko laabh dega.blog ki duniya main swagat hai.
ek ghatna batana chahta hoon:ek baar ram lakshman sarowar ke kinaare tahal rahe the,tabhi ramji ki najar ek bagule par padi jo ek paanvw par sarowar main khada tha.ramji ne kaha ki lakshman ye bagula sant ki tarah dhyaanmagn kitna shaant khada hai.tabhi sarowar ki ek machli ne kaha ki prabhu iski bhakti ek dikhawa hai...ye hamen khaane ke liye ye dhong kar raha hai.har jagah ki sacchai kuch isi tarah ki hai.
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